श्री सतीश श्रीवास्तव
मो० 8808836666
स्थापना: 15 सितम्बर वर्ष 2021
पंजीकरण संख्या : 1537 / 2021
ट्रस्ट पंजीकरण एक्ट : इण्डिया ट्रस्ट एकट 1882 के तहत पंजीकृत
आयकर अधिनियम : आयकर अधिनियम 1961 की धारा 12 A और 80 G के तहत पंजीकृत
(1) जनमानस का कल्याण: प्रभु सेवा परिवार का मुख्य उद्देश्य जनमानस का कल्याण करना है और इस उद्देश्य की पूति हेतु तीर्थ यात्राओं, सत्संग धार्मिक कथाओं, भागवत् कथा आदि का आयोजन ट्रस्ट द्वारा समय-समय पर कराया जाना ।
(2) सनातन धर्म व संस्कृति का प्रसार : सनातन धर्म एवं संस्कृति के प्रचार एवं प्रसार हेतु धार्मिक स्थलों (मन्दिरों) एवं धार्मिक संस्थानों को दान देना ।
(3) गौ सेवा करना : गौमाता की सेवा हेतु धनराशि उपलब्ध कराना जिसके द्वारा गौ शालाओं का रख-रखाव भली भांति किया जा सके एवं गौमाता का संरक्षण एवं सेवा हो सके ।
(4) निर्धनों का सहयोग : निर्धनों की दैनिक आवश्यकताओं (भोजन, वस्त्र आदि) की पूर्ति हेतु वित्तीय सहयोग प्रदान करना। (5) वंचित वर्ग का सहयोग : वंचित वर्ग के सहयोग हेतु वृद्धाश्रम, अनाथालय एवं औषधालयों की स्थापना एवं संचालन में सहयोग करना ।
(6) अन्य धार्मिक संस्थानों का सहयोग : अन्य धार्मिक संस्थान यदि समाज हित में संलग्न होकर कोई आयोजन करता है तो उस धार्मिक आयोजन से सहभागी बनकर सहयोग प्रदान करना ।
(7) निर्धन विद्यार्थियों के लिए सहयोग : वह कुशल निर्धन विद्यार्थी जो पुस्तक नोट बुक आदि की व्यवस्था करने में अक्षम हैं उनकी शिक्षा की व्यवस्था हेतु सहयोग करना ।
(8) शिक्षा, स्वच्छता के प्रति जागरूकता : अशिक्षित नागरिकों में शिक्षा के महत्व को समझाना एवं स्वच्छता का महत्व बताना साथ ही गन्दगी से होने वाली बीमारियों एवं उससे बचाव पर चर्चा करना ।
प्रभु सेवा परिवार की प्रेरणा का मुख्य स्रोत स्वामी विवेकानन्द जी का यह विश्व व्यापी विचार है । अज्ञानी लोग जिसे मनुष्य कहते है, मैं उस नारायण का सेवक हूँ । अर्थात् 'नर सेवा - नारायण सेवा'
इस ट्रस्ट का एकमेव उद्देश्य प्रत्येक उस व्यक्ति का हर सम्भव स्तर पर सहयोग करना है जो मानवीय मूल्यों के आधार पर सहयोग आकांक्षी है। प्रभु सेवा परिवार 'वसुधैव कुटुम्बकम' की भावना से कार्य करते हुए निः स्वार्थ भाव से वंचित वर्ग की सेवा हेतु तन मन धन से तत्पर है। इसके साथ-साथ यह प्रभु सेवा परिवार प्रत्येक व्यक्ति में उच्च मानवीय मूल्यों एवं आध्यात्मिकता क विकास करते हुए देश हित में सभ्य नागरिको के निर्माण में सहयोग कर रहा है। अर्थात् प्रभु सेवा परिवार जन कल्याण एवं सामाजिक कल्याण के लिए पूर्णतः समर्पित है ।
परम पूज्य सन्त श्री रमेश भाई शुक्ल जी का जन्म ज्येष्ठ मास की कृष्ण चतुर्थी 1973 में शारदा नदी के तट पर स्थित पचपेड़ी ग्राम जिला लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश में हुआ है । गुरूजी के माताजी श्रीमती सुधालता सात्विक गृहणी हैं और पिताजी स्व० श्री ऋषि नाथ प्रसाद शुक्ल जो कि अध्यापक रहे और साठ साल की उम्र तक अध्यापक का कार्य किया। वे बहुत ही भगवत प्रेमी व्यक्तित्व के धनी थे ।
गुरूजी की बचपन से रूचि हिन्दू शास्त्र के बारे में जानने और शोध करने की थी, उन्होंने हमेशा अपना समय उसी लिए समर्पित किया। वर्ष 1996 में स्नातकोत्तर की शिक्षा पूरी करने के बाद शिशु मन्दिर में आचार्य के पद पर कार्य कियें । उसी वर्ष गुरूजी का विवाह श्रीमती ज्योत्सना देवी के साथ हुआ जो कि एक आदर्श धर्मपत्नी एवं कुशल गृहणी के रूप में साथ निभा रही है । गुरूजी के दो सन्तान - एक पुत्री एवं एक पुत्र हैं जो अभी शिक्षण कार्य कर रहे हैं।
लगभग तीन साल शिक्षण कार्य करने के बाद वर्ष 2000 में अन्ततः उन्हें भगवान की कृपा प्राप्त हुई और गुरूजी प्रभु की सेवा रामचरित मानस, भागवत कथा, शिव कथा एवं हनुमान कथा का आध्यात्मिक अध्ययन करके, कथा के रूप में आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार करने के उद्देश्य से आगे बढ़े तब से निरन्तर प्रभु की सेवा में लगे हैं। उनकी भगवान की कथाओं के माध्यम से समाज में हिन्दू संस्कृति के मूल्यों का प्रसार करना समाज में फैली कुरीतियों को खतम करने का प्रयास कर रहे हैं ।
गुरूजी ने शास्त्रों का अध्ययन किया, इसके अलावा उन्होंने सभी हिन्दू शास्त्रों के साथ अन्य धर्मों के बारे में भी अध्ययन किया । यूट्यूब, फेसबुक और टी.वी. चैनलों और अन्य सोशल मीडिया के माध्यमों से वह लोगों के सामने श्रीराम कथा, श्रीमद्भागवत कथा, हनुमान कथा एवं शिव कथा का बहुत ही सरल शब्दावली में आध्यात्मिक एवं तार्किक व्याख्या करके लोगों में भगवत भक्ति का प्रचार करते हैं और काफी लोग उनका अनुसरण कर रहे हैं ।
गुरूजी के कार्यों की बात करें तो वह एक अच्छे कथा वाचक हैं और अपनी कथा के माध्यम से लोगों को अच्छे रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं ताकि देश एवं समाज का अच्छा विकास हो, लोगों के सोच में भगवान की भक्ति हो । अपनी कथा में वह हमेशा लोगों को भक्ति के मार्ग पर चलने की सलाह देते हैं ताकि उन्हें एक अच्छा जीवन जीने का अवसर मिल सके ।
गुरूजी ने लोगों के अन्दर प्रभु की भक्ति का संचार होता रहे, इसी के लिए प्रभु सेवा परिवार ट्रस्ट का गठन 15/09/2021 को किया । गुरूजी प्रभुसेवा परिवार के संस्थापक हैं और इस ट्रस्ट के माध्यम से भारत में या भारत के बाहर पवित्र स्थानों में विभिन्न कथाओं का संचालन कर रहे है । गुरूजी गरीब असहाय एवं जरूरतमंदों का सहारा भी बन रहे हैं और ट्रस्ट के माध्यम से उन्होंने जरूरतमंदों की सहायता के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया है ।
गुरूजी का निवास स्थान और सम्पर्क सूत्र इस प्रकार है:-
प्रभु सेवा धाम, 7/633 A, विकास नगर, लखनऊ। मोबाइलः 9839639952