(1)
हमारा प्रभु सेवा परिवार ।
प्रभु के भक्तों का परिवार । ।
राम कथा भागवत कराता,
सबको तीरथ धाम घुमाता ।
कथा सुनें सब तीरथ करके,
हो जावें भवपार ।
हमारा प्रभु सेवा परिवार ।।
निर्धन दीन जनों की सेवा,
गो सेवा और प्रभु की सेवा ।
सेवा जिसका मूल मंत्र है,
करता पर उपकार ।
हमारा प्रभु सेवा परिवार ।।
एक बनें हम, नेक बनें हम,
मानवता के काम करें हम ।
यही हमारा सत्प्रयास है,
श्रेष्ठ बने संसार ।
हमारा प्रभु सेवा परिवार ।।
(2)
हमारा प्रभु सेवा परिवार ।
प्रभु के भक्तो का परिवार ।।
ये जग प्रभु का रूप है प्यारा,
जग सेवा ही मंत्र हमारा ।
दीन जनों की सेवा निसदिन दीन जनो से प्यार,
हमारा प्रभु सेवा परिवार ।।
सेवा सबसे बड़ा धर्म है,
सेवा ही तप है, सुकर्म है ।
सेवा सबसे बड़ी है पूजा सृष्टि का आधार,
हमारा प्रभु सेवा परिवार ।।
आओ हम सब हाथ बढायें,
सेवा यज्ञ को सफल बनायें ।
जग सेवा प्रभु सुमिरन करके हो जाये भव पार,
हमारा प्रभु सेवा परिवार ।।
गुरूजी के संरक्षण में, भाई सतीश जी के अध्यक्षता में, चल रहा, प्रभु सेवा परिवार |
अल्प समय में बढ़ गया । मधुर परिचय और प्यार ।।
सामाजिक कार्य कर रहे, एक ही नहीं अनेक । प्रभु कृपा बनी रहे, जुड़े सब नेक से नेक ।।
शिक्षा का भी हो रहा, बहुत अधिक विस्तार । कर्तव्य ही केवल कर रहे, ना मांग रहे अधिकार ।।
स्थापना दिवस मना रहे, इस परिवार का हम आज । अपनी सेवा कथाओं से, कर रहे दिलों पर राज ।।
ऐसे गुरूजी जिनको मिले, धन्य है वह सब लोग । गुरू जी की कृपा से कटेगें, तन मन के सब रोग ।।
दीर्घायु होवे हमारे गुरू जी, करते रहे कथा । जन समान्य की हर तरह से, दूर हो सभी व्यथा । ।
हृदय से हम कर रहे, गुरू जी को प्रणाम । इसी तरह चलता रहे, सेवा कार्यो के काम । ।
हमें पूर्ण विश्वास है, सुखद होंगे परिणाम । ऐसे सच्चे गुरू जी को, है दंडवत प्रणाम ।।
मन्दिर तुम्हारा ही प्रतिरूप है।
पद्मासन में तुम्हारी मुद्रा मन्दिर की ही प्रतिकृति (नकल) है।
जैसे आलथी-पालथी के जैसा चबूतरा,
धड़ जैसा चबूतरे पर मन्दिर का गोल कमरा,
सिर के जैसा गुम्बद, जूड़े जैसी कलश, कान और
आँख जैसी खिड़कियाँ, मुख जैसा दरवाजा,
आत्मा जैसी मूर्ति और मन जैसा पुजारी |
तुम्हारी देह-मन्दिर में विदेही-परमात्मा बैठा है।
उस परमात्मा को पहचानना ही
इस देह-मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा है।
मैने सुन्दर कांड कराया है, मेरा हनुमान यहां आया है।
मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी।
वो तो मंगल करने आया है मेरा हनुमान .......|
दीन दयाल विरद संभारी, हरहुं नाथ मम संकट भारी |
वो तो संकट हरने आया है। मेरा हनुमान ....... |
जय जय जय हनुमान गोसाई, कृपा करहूँ गुरूदेव को नाई |
वो कुपा करने आया है| मेरा हनुमान ....... |
भूत पिशाच निकट नहि आवे, महावीर जब नाम सुनावे |
वो तो भूत भगाने आया है। मेरा हनुमान .......|
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस वर दीन जानकी माता |
नव निधि को संग में लाया है। मेरा हनुमान .......|
काशी ही मधुवन हो जाए,
विश्वनाथ धड़कन हो जाए !
नयनों में महाकाल बसे तो,
सन्यासी ये मन हो जाए !
सोमनाथ का करें स्मरण,
मल्लिकार्जुन तन हो जाए !
ममलेश्वर का ध्यान करें,
वैद्यनाथ आंगन हो जाए !
भीमाशंकर के दर्शन हों,
नागेश्वर तपवन हो जाए !
त्र्यंबकेश्वर हों नयनों में,
रामेश्वर में राम मिलें तो,
घुश्मेश्वर अंजन बन जाए !
रज केदारनाथ बन जाएं......
!! ॐ नमः शिवाय !!
जगत का सार जीवन का आधार भगवान का नाम है ।
इन्ही राम नाम से भव से बेड़ा पार है ।।
राम भजन बिनु सुनहु खगेसा ।
मिटहि न जीवन केर कलेसा ।।
करते रहोगे भजन धीरे-धीरे ।
वह मिल जायगा वह रतन धीरे-धीरे ।।
अगर प्रभु से मिलने की दिल में तमन्ना ।
करो शुद्ध अन्तः करण धीरे-धीरे ।।
कोई काम दुनिया में मुश्किल नहीं है।
करते रहोगे यतन धीरे-धीरे । ।
बुराई को अपने मन से निकालो ।
सुधर जायेगा तेरा जीवन धीरे-धीरे ।।
।। जय सिया राम, जय हनुमान ।।