आदर्श शिष्य




श्री रमेश कुमार दीक्षित
लखनऊ

करूणाखड्गपातेन छित्त्वा पाशाष्टकं शिशो: । सम्यगानन्दजनक : सदगुरू सोडभिधीयते ।।
एवं श्रुत्वा महादेवि गुरूनिन्दा करोति यः । स याति नरकान्‌ घोरान्‌ यावच्चन्द्रदिवाकरौ ।।

करूणारूपी तलवार के प्रहार से शिष्य के आठों पाशों (संशय, दया, भय, संकोच, निन्दा, प्रतिष्ठा, कुलाभिमान और संपत्ति) को काटकर निर्मल आनंद देनेवाले को सदगुरू कहते हैं ऐसा सुनने पर भी जो मनुष्य गुरूनिन्दा करता है वह (मनुष्य) जब तक सूर्य चन्द्र का अस्तित्व रहता है तब तक घोर नरक में रहता है।

यावत्कल्पान्तको देहस्तावद्देवि गुरूं स्मरेत्‌ । गुरूलोपो न कर्त्तव्य: स्वच्छन्दो यदि वा भवेत्‌ ।।

हे देवी ! देह कल्प के अन्त तक रहे तब तक श्री गुरूदेव का स्मरण करना चाहिए और आत्मज्ञानी होने के बाद भी (स्वच्छन्द अर्थात्‌ स्वरूप का छन्‍द मिलने पर भी) शिष्य को गुरूदेव की शरण नहीं छोड़नी चाहिए |

हुंकारेण न वक्तव्यं प्राज्ञशिष्ये कदाचन । गुरूराग्रे न वक्‍तव्यमसत्यं तु कदाचन ॥

श्री गुरूदेव के समक्ष प्रज्ञावान्‌ शिष्य को कभी हुँकार शब्द से (मैने ऐसे किया... वैसा किया) नहीं बोलना चाहिए और कभी असत्य नही बोलना चाहिए ।

गुरू त्वंकृत्य हुंकृत्य गुरूसान्निध्यभाषण: । अरण्ये निर्जले देशे संभवेद्‌ ब्रह्मराक्षस:॥

गुरूदेव के समक्ष जो हुँकार शब्द से बोलता है अथवा गुरूदेव को तू कहकर जो बोलता है वह निर्जन मरूभूमि में ब्रह्मराक्षस होता है।

अद्वैतं भावयेन्नित्यं सर्वावस्थासु सर्वदा | कदाचिदपि नो कुर्यादद्वैतं गुरूसन्निधौ ।।

सदा और सर्व अवस्थाओं में अद्दैत की भावना करनी चाहिए परन्तु गुरूदेव के साथ अद्वैत की भावना कदापि नही करनी चाहिए ।

दृश्यविस्मृतिपर्यन्तं कुर्याद्‌ गुरूपदार्चनम्‌ । तादृशस्यैव कैवल्यं न च तव्द्यतिरेकिण : |

जब तक दृश्य प्रपंच की विस्मृति न हो जाय तब तक गुरूदेव के पावन चरणारविन्द की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। ऐसा करने वाले को ही कैवल्यपद की प्राप्ति होती है इसके विपरीत करनेवाले को नही होती |

अपि संपूर्णतत्त्वज्ञो गुरूत्यागी भवेद्ददा । भवेत्येव हि तस्यान्तकाले विक्षेपमुत्कटम्‌ |।

संपूर्ण तत्त्वज्ञ भी यदि गुरू का त्याग कर दे तो मृत्यु के समय उसे महान्‌ विक्षेप अवश्य हो जाता है।

गुरौ सति स्वयं देवी परेषां तु कदाचन । उपदेशं न वै कुर्यात्‌ तदा चेद्राक्षसो भवेत्‌ ।।

हे देवी ! गुरू के रहने पर अपने आप कभी किसी को उपदेश नहीं देना चाहिए | इस प्रकार उपदेश देनेवाला ब्रह्माराक्षस होता है।

न गुरूराक्षमे कुर्यात्‌ दुष्पानं परिसर्पणम्‌ । दीक्षा व्याख्या प्रभुत्वादि गुरोराज्ञां न कारयेत्‌ ॥

गुरू के आश्रम में नशा नहीं करना चाहिए टहलना नही चाहिए । दीक्षा देना व्याख्यान करना प्रभुत्व दिखाना और गुरू को आज्ञा करना ये सब निषिद्ध हैं।

नोपाश्रमं च पर्यक न च पादप्रसारणम्‌ । नांगभोगादिक कर्यात्र लीलामपरामपि |॥

गुरू के आश्रम में अपना छप्पर और पलंग नहीं बनाना चाहिए (गुरूदेव के सम्मुख) पैर नहीं पसारना, शरीर के भोग नहीं भोगने चाहिए और अन्य लीलाएँ नहीं करनी चाहिए |

गुरूणां सदसद्वापि यदुक्तं तन्न लंघयेत् । कुर्वन्नाज्ञां दिवारात्रौ दासवन्निवसेद् गुरौ ||

गुरूओं की बात सच्ची हो या झूठी, परन्तु उनका कभी उल्लंघन नहीं करना चाहिए । रात और दिन गुरूदेव की आज्ञा का पालन करते हुए उनके सान्निध्य में दास बन कर रहना चाहिए ।

अदत्तं न गुरोर्द्रव्यमुपभुंजीत कहिर्चित् । दत्तं च रंकवद् ग्राह्यं प्राणोप्येतेन लभ्यते ।।

जो द्रव्य गुरूदेव ने नहीं दिया हो उसका उपयोग कभी नहीं करना चाहिए । गुरूदेव के दिये हुए द्रव्य को भी गरीब की तरह ग्रहण करना चाहिए । उससे प्राण भी प्राप्त हो सकते है ।

पादुकासनशय्यादि गुरूणा यदभिष्टितम् । नमस्कुर्वीत तत्सर्व पादाभ्यां न स्पृशेत् कचित् ।।

पादुका आसन बिस्तर आदि जो कुछ भी गुरूदेव के उपयोग में आते हों उन सब को नमस्कार करने चाहिए और उनको पैर से कभी नहीं छूना चाहिए ।

गच्छतः पृष्ठतो गच्छेत् गुरूच्छायां न लंघयेत् । नोल्बणं धारयेद्वेषं नालंकारास्ततोल्बणान् ।।

चलते हुए गुरूदेव के पीछे चलना उनकी परछाई का भी उल्लंघन नहीं करना चाहिए । गुरूदेव के समझ कीमती वेशभूषा आभूषण आदि धारण नहीं करने चाहिए ।

गुरूनिन्दाकरं दृष्ट्वा धावयेदथ वासयेत् । स्थानं वा तत्परित्याज्यं जिह्वाच्छेदाक्षमो यदि ।।

गुरूदेव की निन्दा करनेवाले को देखकर यदि उसकी जिह्वा काट डालने में समर्थ न हो तो उसे अपने स्थान से भगा देना चाहिए । यदि वह ठहरे तो स्वयं उस स्थान का परित्याग करना चाहिए ।

मुनिभिः पन्नगैर्वापि सुरैवा शापितो यदि । कालमृत्युभयाद्वापि गुरुः संत्राति पार्वति ।।

हे पार्वती ! मुनियों पन्नगों और देवताओं के शाप से तथा यथा काल आये हुए मृत्यु के भय से भी शिष्य को गुरूदेव बचा सकते है ।

(स्कन्द पुराण से साभार)


कथाओं का विवरण
श्री कृष्ण कथा (खरसिया छत्तिसगढ़) 15/01/2025 से 23/01/2025    |    शिव कथा (मूड़पार हसौद छत्तिसगढ़) 24/01/2025 से 31/01/2025    |    श्री राम कथा (प्रयाग उ०प्र०) 02/02/2025 से 12/02/2025    |    श्रीमद् भागवत कथा (एम रोड लखनऊ उ०प्र०) 13/02/2025 से 20/02/2025    |    श्री कृष्ण कथा (मालकान गिरि उड़ीसा) 22/02/2025 से 28/02/2025    |    श्रीमद् भागवत कथा (शुक्रताल उ०प्र०) 04/03/2025 से 11/03/2025    |    श्री भक्तमाल कथा (चौरी बाजार भदोही उ०प्र०) 16/03/2025 से 23/03/2025    |    श्री हनुमत कथा (गुमावा राय बरेली उ०प्र० ) 24/03/2025 से 31/03/2025    |    श्री राम कथा (गायत्री पुरन सन्त कबीर नगर उ०प्र० ) 02/04/2025 से 10/04/2025    |    श्रीमद् भगवत कथा (सेक्टर-29, चण्डीगढ़) 12/04/2025 से 19/04/2025    |    श्री हनुमत कथा (सेक्टर- 20, चण्डीगढ़) 19/04/2025 से 27/042025    |    श्री राम कथा (जानकीपुरम लखनऊ, उ०प्र०) 28/04/2025 से 06/05/2025    |    शिव कथा (रावन खीदरा छत्तिसगढ़) 09/05/2025 से 15/05/2025    |    गऊ कथा (त्रिवेनी नगर लखनऊ उ०प्र०) 17/05/2025 से 23/05/2025    |    शिव कथा (तिघरा 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नवम्बर 2023 से 03 दिसम्बर 2023)    |    पतरा, मध्य प्रदेश (15 दिसम्बर 2023 से 22 दिसम्बर 2023)    |    जगनन्‍नाथपुरी धाम, उड़ीशा (26 दिसंबर 2023 से 01 जनवरी 2024)    |    मुम्बई, महाराष्ट्र (05 जनवरी 2024 से 13 जनवरी 2024)    |    लखनऊ, उत्तर प्रदेश (16 जनवरी 2024 से 26 जनवरी 2024)    |    छत्तीसगढ़ (02 फरवरी 2024 से 08 फरवरी 2024)    |    रायगढ़, छत्तीसगढ़ (10 फरवरी 2024 से 18 फरवरी 2024)    |    गोरखपुर, उत्तर प्रदेश (21 फरवरी 2024 से 28 फरवरी 2024)    |    गोविन्द साहिब अकबरपुर, उत्तर प्रदेश (29 फरवरी 2024 से 08 मार्च 2024)    |    चौरी, उत्तर प्रदेश (28 मार्च 2024 से 05 अप्रैल 2024)    |    बड़ोदा, गुजरात (09 अप्रैल 2024 से 17 अप्रैल 2024)    |    पचौरा ग्वालियर, मध्य प्रदेश (26 सितम्बर 2022 से 04 अक्टूबर 2022)    |    महेवा इटावा, उत्तर प्रदेश (05 अक्टूबर 2022 से 13 अक्टूबर 2022)   |    अयोध्या, उत्तर प्रदेश (14 अक्टूबर 2022 से 22 अक्टूबर 2022)   |    विकास नगर लखनऊ, उत्तर प्रदेश (27 अक्टूबर 2022 से 03 नवम्बर 2022)   |    खदरा लखनऊ, उत्तर प्रदेश (05 नवम्बर 2022 से 13 नवम्बर 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|    कोपागंज, मऊ (24 मार्च 2022 से 01 अप्रैल 2022)    |    सीतापुर, उत्तर प्रदेश (02 अप्रैल 2022 से 10 अप्रैल 2022)    |    हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश (21 अप्रैल 2022 से 28 अप्रैल 2022)    |    पटियाला, पंजाब (09 मई 2022 से 17 मई 2022)    |    चार धाम यात्रा, उत्तराखण्ड (19 मई 2022 से 31 मई 2022)    |    लखीमपुर, उत्तर प्रदेश (12 जून 2022 से 18 जून 2022)    |    बैंगलौर, कर्नाटक (20 जून 2022 से 3० जून 2022)    |    पशुपति नाथ, नेपाल यात्रा (02 जुलाई 2022 से 05 जलाई 2022)    |    गुरू पूर्णिमा, लखनऊ (08 जुलाई 2022 से 13 जुलाई 2022)    |    लिलुवा, कोलकाता (18 जुलाई 2022 से 25 जुलाई 2022)    |    अजमेर, उत्तर प्रदेश (27 जुलाई 2022 से 04 अगस्त 2022)    |    सेक्टर 46, चंडीगढ़ (15 अगस्त 2022 से 22 अगस्त 2022)    |    सेक्टर 30बी, चंडीगढ़ (25 अगस्त 2022 से 02 सितम्बर 2022)    |    'टनकनपुर, उत्तराखण्ड (04 सितम्बर 2022 से 14 सितम्बर 2022)    |    लखनऊ, उत्तर प्रदेश (26 सितंबर 2022 से 04 अक्टूबर 2022)    |    पचौरा, मध्यप्रदेश (05 अक्टूबर 2022 से 13 अक्टूबर 2022)    |    महेबा इटावा, उत्तर प्रदेश (14 अक्टूबर 2022 से 22 अक्टूबर 2022)    |    अयोध्या, उत्तर प्रदेश (27 अक्दूबर 2022 से 04 नवंबर 2022)    |    लखनऊ, उत्तर प्रदेश (05 नवंबर 2022 से 13 नवंबर 2022)    |    लखनऊ, उत्तर प्रदेश (17 नवंबर 2022 से 25 नवंबर 2022)    |    प्रयाग, उत्तर प्रदेश (26 नवंबर 2022 से 02 दिसबर 2022)    |    सीतापुर, उत्तर प्रदेश (03 दिसंबर 2022 से 11 दिसबर 2022)    |    चित्रकूट मध्य प्रदेश (13 दिसंबर 2022 से 20 दिसबर 2022)    |    गोरखपुर शहर उत्तर प्रदेश (24 दिसंबर 2022 से 07 जनवरी 2022)    |    दक्षिण भारत यात्रा (08 जनवरी 2022 से 16 जनवरी 2023)    |    रायपुर छत्तीसगढ़ (18 जनवरी 2022 से 26 जनवरी 2023)    |    हरिद्वार उत्तराखंड (29 जनवरी 2022 से 06 फरवरी 2023)    |    प्रयाग, उत्तर प्रदेश (10 फरवरी 2022 से 18 फरवरी 2023)    |    छत्तीसगढ (19 फरवरी 2022 से 23 फरवरी 2023)    |    शिमला हिमाचल प्रदेश (25 फरवरी 2022 से 28 फरवरी 2023)    |    -->

राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।


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