प्रकृति संरक्षण ईश्वर की उपासना




श्री सत्य प्रकाश राय
प्रयागराज (3. प्र.)

ईश्वर ने मानव और जीव जन्तुओ तथा पशु पक्षियो के लिए जो संसाधन दिये है वह प्रकृति के रूप में हमारे समक्ष विद्यमान है। जल और वायु के विना जीवन नही है। धरती पर जो भी बनस्पतियां और पेड पौधे उपलब्ध है वह जल के विना सम्भव नही है जहां जल नही वहां कुछ नही | धरती पर उपलब्ध वृक्षो और बनस्पतियों से ऑक्सीजन युक्‍त हवा मिलती है जो प्रतिपल जीवन के लिए आवश्यक होती है क्योकि बिना आक्सीजन युक्‍त वायु के कोई जीवित नही रह सकता है। वायु के सहारे ही समुद्र से जल के कण बादल बनकर चारो तरफ फैलते है और धरती पर प्रचुर मात्रा में जल बृष्टि करते है और वही जल धरती मे रिचार्ज होता है तालाब झील और नदियो मे आता है। धरती मे जो जल इकट्ठा होता है वह जब हैन्ड पम्प बोरिंग नलकूप के माध्यम से मिलता है वह धरती की तमाम सतहो के माध्यम से गुजरता हुआ शुद्ध होकर मिलता है जो पीने लायक हो जाता है वही जल खेती की सिचाई के काम आता है और उसी जल के सहारे पेड पौधे बनस्पतियां और फसले उत्पन्न होती है जिससे मानव और जीव जन्तुओ तथा पशुपक्षियो का जीवन चलता है।

ईश्वर ने इन प्राकृतिक सम्पदाओ के संरक्षण की जिम्मेदारी मनुष्य को दिया है। अगर मनुष्य इस उत्तरदायित्व को निभायेगा नही तो प्राकृतिक सम्पदाओ का आभाव हो सकता है। हम अपनी आवश्यकताओ के लिए लकड़ी का उपयोग करते है ऐसी स्थिति मे बन सम्पदाओ की कमी होती रहती है। हमारी जिम्मेदारी है कि धरती पर पर्याप्त बन सम्पदाये उपलब्ध रहे ताकि न तो आक्सीजन युक्त हवा की कमी होने पाये और न उपयोग के लिए लकड़ी की कमी हो | इसी लिए बडे पैमाने पर प्रति वर्ष पौधे लगाने का अभियान चलाया जाता है इसे सामाजिक आन्दोलन बनाये जाने की जरूरत है। हमारे शास्त्रो मे इसीलिए वृक्ष को देवता कहा गया विशेष रूप से कुछ ऐसे पेड है जो हम काटने से डरते है जैसे पीपल और बरगद । गीता मे भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि वृक्षो में मै पीपल हूँ। हम बरगद की भी पूजा करते है क्योकि बरगद में हम भगवान शंकर का रूप देखते है जो समाज का संरक्षण करता है। पाकड भी बहुत छाया देता है जिसमें हम भगवान ब्रह्मा का रूप देखते है यह पेड हमे पर्याप्त छाया देता है। इसीलिए पीपल बरगद और पाकड हम काटते नही है और इन पेडो के समूह को हरिशंकरी कहते है।

जल और वायु एक दूसरे के पूरक है अगर वायु नही होती तो जल नही होगा और अगर जल नही होगा तो वायु नही होगी | यह दोनो नही होगा तो मानव और पशु पक्षी जीव जन्तु नही होगे। मनुष्य की यह जिम्मेदारी है कि बरसात के माध्यम से जो जल धरती पर आता है वह नदी तालाब झील के रूप मे संरक्षित होने के साथ साथ पर्याप्त मात्रा मे धरती मे भी संरक्षित हो | धरती से जल का जितना हम दोहन करते है उससे अधिक मात्रा में धरती को जल देने की भी जरूरत है ताकि धरती में जल की कमी न पडे। इसीलिए धरती मे जल रिचार्ज करने के लिए अलग से व्यवस्था करना आवश्यक है। शहरो में बडी मात्रा में पक्की

सडक मकान आदि बन जाने के कारण वर्षा जल धरती मे रिचार्ज होने के बजाय बहकर चला जाता है जिससे महानगरो मे धरती में पानी की कमी हो जाती है और वाटर लेविल नीचे चला जाता है या विलकुल पानी की कमी पड सकती है जिससे जल संकट खडा हो सकता है इसलिए शहरो में भविष्य मे जल संकट न आवे इस हेतु वाटर रिचार्जिग व्यवस्था बनाना चाहिए ।

प्रकृति ने जल और वायु के अतिरिक्त बहुत सी व्यवस्थाएं दिया है जो उपयोगी है। धरती को उपजाऊ बनाये रखने के लिए केचुए होते थे जो धरती के नीचे से उपजाऊ मिट्टी लाते थे जिससे फसलो की उपज के लिए धरती को शक्ति मिलती थी लेकिन रसायनिक उर्बरको के प्रयोग से केचुए या तो मर गये या धरती में बहुत नीचे चले गये तथा केचुए पैदा नही हो रहे है जिससे धरती की उर्बरा शक्ति कमजोर हो रही है जो भविष्य के लिए घाटक है। चाहे मनुष्य का शरीर हो या धरती हम प्राकृतिक शक्ति से ही ताकतवर रह सकते है बाहरी दवाओ या उर्बरको के बल पर अधिक दिन तक शक्तिशाली नही रह सकते है इसकारण प्रकृति के विज्ञान को समझकर देशी गाय और उसके गौमूत्र से धरती की उर्बरा शक्ति बढाना चाहिए । इसीलिए देशी गाय को हम मां के रूप में मानते है। गाय न केवल दूध देती है बल्कि गोबर और गौमूत्र से धरती की शक्ति शाली बनाती है । इसलिए गौ संरक्षण पर हमे अधिक ध्यान देना चाहिए । भगवान श्रीकृष्ण गायो के बहुत बडे संरक्षक थे क्योकि गाय हमारी खेती का सबसे बडा आधार है। रसायनिक उर्बरको के कारण हम धरती को दिनोदिन कमजोर कर रहे है जो बडे संकट का कारण बन सकता है हमे प्राकृतिक गौआधारित खेती को बढावा देना चाहिए ।

वास्तव में प्रकृति ने हम सब कुछ दिया है जरूरत है उसे समझने की और जीवन में ढालने की । यदि हम इसे नही समझेंगे तो मानव और जीवजन्तुओ का भविष्य अंधकार मय होगा और अगर हम समझकर इनका संरक्षण करेंगे तो ईश्वर द्वारा दी गयी व्यवस्था के हम संरक्षक बनेगे और यही सबसे बडी ईश्वर की पूजा है तथा मानवीय सेवा भी है क्योकि प्रकृति के रूप में भगवान हमे सब कुछ दिया है और प्रकृति को हरा भरा रखना ईश्वर की पूजा है।


कथाओं का विवरण
श्री कृष्ण कथा (खरसिया छत्तिसगढ़) 15/01/2025 से 23/01/2025    |    शिव कथा (मूड़पार हसौद छत्तिसगढ़) 24/01/2025 से 31/01/2025    |    श्री राम कथा (प्रयाग उ०प्र०) 02/02/2025 से 12/02/2025    |    श्रीमद् भागवत कथा (एम रोड लखनऊ उ०प्र०) 13/02/2025 से 20/02/2025    |    श्री कृष्ण कथा (मालकान गिरि उड़ीसा) 22/02/2025 से 28/02/2025    |    श्रीमद् भागवत कथा (शुक्रताल उ०प्र०) 04/03/2025 से 11/03/2025    |    श्री भक्तमाल कथा (चौरी बाजार भदोही उ०प्र०) 16/03/2025 से 23/03/2025    |    श्री हनुमत कथा (गुमावा राय बरेली उ०प्र० ) 24/03/2025 से 31/03/2025    |    श्री राम कथा (गायत्री पुरन सन्त कबीर नगर उ०प्र० ) 02/04/2025 से 10/04/2025    |    श्रीमद् भगवत कथा (सेक्टर-29, चण्डीगढ़) 12/04/2025 से 19/04/2025    |    श्री हनुमत कथा (सेक्टर- 20, चण्डीगढ़) 19/04/2025 से 27/042025    |    श्री राम कथा (जानकीपुरम लखनऊ, उ०प्र०) 28/04/2025 से 06/05/2025    |    शिव कथा (रावन खीदरा छत्तिसगढ़) 09/05/2025 से 15/05/2025    |    गऊ कथा (त्रिवेनी नगर लखनऊ उ०प्र०) 17/05/2025 से 23/05/2025    |    शिव कथा (तिघरा रीवा, म०प्र०) 25/05/2025 से 02/06/2025    |    श्री राम कथा (बडहल गंज गोरखपुर उ0प्र0) 11/06/2025 से 19/06/2025    |    श्री राम कथा (पूणे महाराष्ट्र) 22/06/2025 से 29/06/2025    |    दशरथ चरित गुरूपूर्णिमा विशेष (लखनऊ उ०प्र०) 07/07/2025 से 10/07/2025    |    शिव कथा (लखनऊ उ०प्र०) 13/07/2025 से 17/7/2025    |    मीरा चरित्र (हावड़ा पoबं०) 20/07/2025 से 27/07/2025    |    श्रीराम कथा (लिलुआ, हावड़ा पoबं०) 31/07/2025 से 08/08/2025    |    भूटान यात्रा (भूटान यात्रा) 09/08/2025 से 12/08/2025    |    श्रीलंका यात्रा (श्रीलंका यात्रा) 14/08/2025 से 21/08/2025    |    श्री राम कथा ((अमेठी उ०प्र०) 23/08/2025 से 02/09/2025    |    श्रीमद् भागवत कथा (हरिद्वार, उतराखण्ड) 06/09/2025 से 13/09/2025    |    सुल्तान पुर, उत्तर प्रदेश (17 सितम्बर 2023 से 27 सितम्बर 2023)    |    कन्नौज, उत्तर प्रदेश (03 अक्टूबर 2023 से 13 अक्टूबर 2023)    |    पचौरा ग्वालियर, मध्य प्रदेश (15 अक्टूबर 2023 से 23 अक्टूबर 2023)    |    उदयपुर, राजस्थान (15 नवम्बर 2023 से 23 नवम्बर 2023)    |    खदरा लखनऊ, उत्तर प्रदेश (25 नवम्बर 2023 से 03 दिसम्बर 2023)    |    पतरा, मध्य प्रदेश (15 दिसम्बर 2023 से 22 दिसम्बर 2023)    |    जगनन्‍नाथपुरी धाम, उड़ीशा (26 दिसंबर 2023 से 01 जनवरी 2024)    |    मुम्बई, महाराष्ट्र (05 जनवरी 2024 से 13 जनवरी 2024)    |    लखनऊ, उत्तर प्रदेश (16 जनवरी 2024 से 26 जनवरी 2024)    |    छत्तीसगढ़ (02 फरवरी 2024 से 08 फरवरी 2024)    |    रायगढ़, छत्तीसगढ़ (10 फरवरी 2024 से 18 फरवरी 2024)    |    गोरखपुर, उत्तर प्रदेश (21 फरवरी 2024 से 28 फरवरी 2024)    |    गोविन्द साहिब अकबरपुर, उत्तर प्रदेश (29 फरवरी 2024 से 08 मार्च 2024)    |    चौरी, उत्तर प्रदेश (28 मार्च 2024 से 05 अप्रैल 2024)    |    बड़ोदा, गुजरात (09 अप्रैल 2024 से 17 अप्रैल 2024)    |    पचौरा ग्वालियर, मध्य प्रदेश (26 सितम्बर 2022 से 04 अक्टूबर 2022)    |    महेवा इटावा, उत्तर प्रदेश (05 अक्टूबर 2022 से 13 अक्टूबर 2022)   |    अयोध्या, उत्तर प्रदेश (14 अक्टूबर 2022 से 22 अक्टूबर 2022)   |    विकास नगर लखनऊ, उत्तर प्रदेश (27 अक्टूबर 2022 से 03 नवम्बर 2022)   |    खदरा लखनऊ, उत्तर प्रदेश (05 नवम्बर 2022 से 13 नवम्बर 2022)   |    प्रयाग, उत्तर प्रदेश (16 नवम्बर 2022 से 24 नवम्बर 2022)   |    सीतापुर, उत्तर प्रदेश (26 नवम्बर 2022 से 02 दिसम्बर 2022)   |    चित्रकूट, मध्य प्रदेश (03 दिसम्बर 2022 से 11 दिसम्बर 2022)   |    गोरखपुर, उत्तर प्रदेश (13 दिसम्बर 2022 से 20 दिसम्बर 2022)   |    दक्षिणी भारत की यात्रा एवं राम कथा (24 दिसम्बर 2022 से 07 जनवरी 2023)   |    करनैल गंज गोंडा, उत्तर प्रदेश (08 जनवरी 2023 से 18 जनवरी 2023)   |    लखनऊ, उत्तर प्रदेश (24 जनवरी 2023 से 26 जनवरी 2023)   |    प्रयाग, उत्तर प्रदेश (29 जनवरी 2023 से 06 फरवरी 2023)   |    भेड़ी कोना छत्तीसगढ़ (10 फरवरी 2023 से 18 फरवरी 2023)   |    नादौन, हिमाचल प्रदेश (20 फरवरी 2023 से 24 फरवरी 2023)   |    गोपी गंज, उत्तर प्रदेश (26 फरवरी 2023 से 6 मार्च 2023)   |    चंदौसी, उत्तर प्रदेश (10 मार्च 2023 से 18 मार्च 2023)   |    चंडीगढ़ (22 मार्च 2023 से 30 मार्च 2023)   |    बढहल गंज, उत्तर प्रदेश (01 अप्रैल 2023 से 09 अप्रैल 2023)   |    पुटकापुरी, छत्तीसगढ़ (11 अप्रैल 2023 से 18 अप्रैल 2023)   |    उत्तराखण्ड (22 अप्रैल 2023 से 30 अप्रैल 2023)   |    रायगढ़, छत्तीसगढ़ (04 मई 2023 से 12 मई 2023)   |    घुलिया, महाराष्ट्र (13 मई 2023 से 21 मई 2023)   |    गोपाल गंज, विहार (25 मई 2023 से 02 जून 2023)   |    जानकी पुरम लखनऊ, उत्तर प्रदेश (05 जून 2023 से 13 जून 2023)   |    लखीमपुर, उत्तर प्रदेश (15 जून 2023 से 19 जून 2023)   |    अलीगंज, लखनऊ (20 जून 2023 से 30 जून 2023)   |    अयोध्या, उत्तर प्रदेश (02 जुलाई 2023 से 10 जुलाई 2023)   |    कोलकाता, पश्चिम बंगाल (15 जुलाई 2023 से 23 जुलाई 2023)   |    लखीमपुर, ऊत्तर प्रदेश (26 जुलाई 2023 से 06 अगस्त 2023)   |    बद्रीनाथ ध्वाम, उत्तराखण्ड (09 अगस्त 2023 से 23 अगस्त 2023)   |    अमृतसर, पंजाब (21 अगस्त 2023 से 28 अगस्त 2023)   |    चंडीगढ़ (03 सितम्बर 2023 से 10 सितम्बर 2023)   |    द्वारिकापुरी, गुजरात (24 दिसम्बर 2024 से 02 जनवरी 2022)    |    लखनऊ, उत्तर प्रदेश (22 जनवरी 2022 से 26 जनवरी 2022)    |    चित्रकूट, मध्यप्रदेश (11 फरवरी 2022 से 03 फरवरी 2022)    |    इटावा, ऊत्तर प्रदेश (22 फरवरी 2022 से 03 मार्च 2022)    |    भिवानी, हरयाणा (03 मार्च 2022 से 10 मार्च 2022)    |    कोपागंज, मऊ (24 मार्च 2022 से 01 अप्रैल 2022)    |    सीतापुर, उत्तर प्रदेश (02 अप्रैल 2022 से 10 अप्रैल 2022)    |    हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश (21 अप्रैल 2022 से 28 अप्रैल 2022)    |    पटियाला, पंजाब (09 मई 2022 से 17 मई 2022)    |    चार धाम यात्रा, उत्तराखण्ड (19 मई 2022 से 31 मई 2022)    |    लखीमपुर, उत्तर प्रदेश (12 जून 2022 से 18 जून 2022)    |    बैंगलौर, कर्नाटक (20 जून 2022 से 3० जून 2022)    |    पशुपति नाथ, नेपाल यात्रा (02 जुलाई 2022 से 05 जलाई 2022)    |    गुरू पूर्णिमा, लखनऊ (08 जुलाई 2022 से 13 जुलाई 2022)    |    लिलुवा, कोलकाता (18 जुलाई 2022 से 25 जुलाई 2022)    |    अजमेर, उत्तर प्रदेश (27 जुलाई 2022 से 04 अगस्त 2022)    |    सेक्टर 46, चंडीगढ़ (15 अगस्त 2022 से 22 अगस्त 2022)    |    सेक्टर 30बी, चंडीगढ़ (25 अगस्त 2022 से 02 सितम्बर 2022)    |    'टनकनपुर, उत्तराखण्ड (04 सितम्बर 2022 से 14 सितम्बर 2022)    |    लखनऊ, उत्तर प्रदेश (26 सितंबर 2022 से 04 अक्टूबर 2022)    |    पचौरा, मध्यप्रदेश (05 अक्टूबर 2022 से 13 अक्टूबर 2022)    |    महेबा इटावा, उत्तर प्रदेश (14 अक्टूबर 2022 से 22 अक्टूबर 2022)    |    अयोध्या, उत्तर प्रदेश (27 अक्दूबर 2022 से 04 नवंबर 2022)    |    लखनऊ, उत्तर प्रदेश (05 नवंबर 2022 से 13 नवंबर 2022)    |    लखनऊ, उत्तर प्रदेश (17 नवंबर 2022 से 25 नवंबर 2022)    |    प्रयाग, उत्तर प्रदेश (26 नवंबर 2022 से 02 दिसबर 2022)    |    सीतापुर, उत्तर प्रदेश (03 दिसंबर 2022 से 11 दिसबर 2022)    |    चित्रकूट मध्य प्रदेश (13 दिसंबर 2022 से 20 दिसबर 2022)    |    गोरखपुर शहर उत्तर प्रदेश (24 दिसंबर 2022 से 07 जनवरी 2022)    |    दक्षिण भारत यात्रा (08 जनवरी 2022 से 16 जनवरी 2023)    |    रायपुर छत्तीसगढ़ (18 जनवरी 2022 से 26 जनवरी 2023)    |    हरिद्वार उत्तराखंड (29 जनवरी 2022 से 06 फरवरी 2023)    |    प्रयाग, उत्तर प्रदेश (10 फरवरी 2022 से 18 फरवरी 2023)    |    छत्तीसगढ (19 फरवरी 2022 से 23 फरवरी 2023)    |    शिमला हिमाचल प्रदेश (25 फरवरी 2022 से 28 फरवरी 2023)    |    -->

राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।


प्रभु सेवा परिवार